बहुजन समाज पार्टी को खुला पत्र
प्रती
बहुजन समाज पार्टी
मेरे
सभी मित्र,मी
भिक्षु धम्मानंद , पिछले १२
सालो से धम्म
कि सेवा कर
रहा हुं.मेरे
पिता काल.दीपक
गजभिये नागपूर मे बसप
के प्रभारी थे.पिछले २० सालो
से वे बसप
मे काम कर
रहे थे .वे
बहोत गरीब लेकिन
बुद्ध और बाबासाहेब
आंबेडकर के प्रती
श्रद्धावान और स्वाभिमानी
थे .उन्होने अपना
सर जीवन बसप
के लिये समर्पित
कर दिया था.तारीख 25 जनवरी २०१४
को ,मेरे पिता
काल.दीपकजी इनका
रोड दुर्घटना मे
देहांत हुआ.
पार्टी
के अध्यक्ष कु.बहन इनके
जन्मदिन के मोके
पर नागपूर कुछ
कार्याक्रमो का आयोजन
किया गया था.तारीख १० जनवरी
२०१४ को,उस
कार्यक्रम के पूर्व
तयारी और प्रचार
के लिये मेरे
पिताजी भी गये
थे.काम खतम
होणे के बाद
जब वे रात
३ बजे घर
वापीस आ रहे
थे उस समय
उनका रोड अक्सिडन्ट
हुआ.उनके सर
के पिछले हिस्से
मे भारी जखम
हुई.वे ६
दिन तक अस्पताल
मे बेहोष रहे.और आखिर
,१५ दिन के
जीवन मृत्यू के
संघर्ष मे मृत्यू
ने बाजी मारली.मेरे पिताजी
का देहांत हो
गया.इस समय
महाराष्ट्र मे विधान
सभा चुनाव कि
धूम माची हुई
थी.बसप के
सारे कार्यकर्ता नाग्प्य्र
मे मोजुद थे,
तारीख
२७ जनवरी २०१४,
पार्टी के राष्ट्रीय
महासचिव वीरसिंग ,विलास गरुड
,मुरलीधर मेश्राम (नाग.पक्ष
नेता) और नागपूर
के गल्ली
के कार्यकर्ता हमे
मिलने और सत्वाना
करणे के लिये
आये.मैने उन्हे
इस परिवार कि
दुक्खभरी कहाणी सुनाई. इस
परिवार का अन्नदाता
,मुख्यपुरुष इन्हे छोड के
चला गया ,इन्हे
रहने के लिये
घर नही.ये
लोग बहोत हि
गरीब ही.इन्होने
२०-२५ साल
अपना तन मन
धन बसप के
लिये समर्पित कर
दिया. ये सब
सुनकर उन्होने परिवार
को बुद्ध पोर्णिमा
तक ८०० स्क्वे.फिट प्लॉट
देणे का वचन
दिया.
नागपूर
के शहरध्यक्ष विस्वास
राउत इन्होने हमसे
उपरोक्त काम के
लिये २५०० रूप
मांगे .मेरे भाई
ने किसी से
पैसे उधार मांग
कर पैसो का
बंदोबस्त किया..मैने उन्हे
प्रती ५००.रूप.
के दो बॉन्ड
पेपर और १५००
रूप.नगद दिये.इस दुखः
भरे माहोल मी
परिवार मे इस
बात से ख़ुशी
थी कि खैर
,परिवार के कर्ता
पुरुष जाने के
बाद कम से
कम हमे रस्ते
पर रस्ते पे
रहकर भिक मांगने
कि परिस्थिती नही
आयेंगी.४-५ महिनो
तक.हम उन्ह्के
फोन का इंजर
कर रहे थे,आखिर मैने
हि उन्हे फोन
किया.लेकिन किसी
ने भी रिस्पोन्स
नही दिया.मी
सुरेश माने जो
विदर्भ के प्रभारी
थे,उन्हे भी
मिला.लेकिन ना
उन्होने मुझे जय
भीम कहा ना
मेरे से बात
कि.मैने बसप
से सम्बन्धित हर
पदाधिकारी को संपर्क
किया,लेकिन हर
किसीने मुझे दूर
करणे कि कोशिश
कि.
वीर
सिंग - हमारी सत्ता नाही
है महाराष्ट्र मे.हम कुछ नाही
कर सकते
मुरलीधर
मेश्राम - ये मेरा
काम नही है,
पार्टीका काम है.
विलास
गरुड - ये तो
गायब हो गये
उस दिन से
विस्वास
राउत- आप चुनाव
तक रुकीये .उसके
बाद देखेंगे.(उसके
बाद मैने इन्हे
१०० बर फोन
किया लेकिन मेरा
नंबर देखा कि
ये फोन उठाते
हि नही. इन्होने
तो मुझे अप्रत्यक्ष
मारणे कि धमकी
दि.इन्होने तो
कहा कि खबरदार
मुझे फोन
किया तो, मेरे
घर बिलकुल नाही
आना नाही तो
तुम्हे दिखाना पडेगा कि
विस्वास राउत क्या
चीज है )
हम
बुद्ध बाबासाहाब के
रस्ते चलने वाले
शांतीप्रिय लोग है.
सच बताता हु
हम सब डर
गये थे इसकी
धमकी से.हमने
इन लोगो के
पीछे लगना छोड
दिया.
आज
मेरा परिवार,मेरी
मा,मेरा छोटा
भाई,नागपूर मे
३००० रूप,के
किरायके मकान मे
रहते है.क्योकी
उनके पास रहने
के लिये खुदका
कोई घर नही
है.मेरे भाई
ने उसकी पढाई
छोड दि,और
जीवन जिने और
मा को सम्भालने
के लिये काबाडी
का काम करता
है.आप सभी
समझ सकते है
कि ऐसी हालतो
मे जिना कितना
पीडादायक और कठीण
है.
परिवार
का मुख्य कर्ता
पुरुष जाने के
बाद जो दुखः
हुआ,उस से भी
ज्यादा दुखः इन
बेइमान धोकेबाज हरामखोर लोगो से
हुआ.मॆ इन्ह
बेशरम लोगो का
धिक्कार करता हु.निषेध करता हु.जिस व्यक्ती
ने अपने जीवन
के २५.साल
BSP के लिये व्यतीत
किये,ऐसे व्यक्ती
के मरणे के
बाद उसका परिवार
रस्ते पे नही
आना चाहिये.पार्टी
ने ऐसे परिवारो
के लिये कुछ
प्रबंध करणा चाहिये.आप लोग
बहन मायावती के
गले मे ५००००
रूप,का हर
डाल सकते है,उस से
अच्छा ये पैसा
किसी गरीब अनाथ
पार्टी के कार्यकर्ता
को दिजीये जो
हमारी तरह दुखी
जीवन जी रहे
है.
मॆ,मेरा परिवार
और मेरे सारे
संबंधी इस नाइन्साफी
से बहोत व्यथित
हुए है.जिस
पार्टी पर हमने
विस्वास रखा श्रद्धा
रखी समर्पण किया
आज उसी पार्टी
के इन्ह बेशरम
लोगो ने हमसे
सबसे बडा विस्वासघात
किया है.
मेरा
आरोप है इस
पार्टी पर और
इन्ह बेशरम लोगोपर
,,तुम्हारी वजसे यह
परिवार बेघर हो
गया है,दुख्ही
हुआ है.
मी
उन्ह सभी गरीब
कार्यकर्ताओ को
सावधान करता हु
कि अगर तुम
पार्टी का काम
करते करते मर
जाते हो तो
बहुजन समाज पार्टी
नाम कि यह
राजकीय पार्टी तुम्हारे बेघर
अनाथ परिवार का
कभी खयाल नाही
करेंगी.क्योकी इस पार्टी
के सभी पदाधिकारी
(विशेषत वीर सिंग
,विलास गरुड,सुरेश
माने )ये बेशरम
हरामखोर गद्दार बेइमान है.इन्हे बस सत्ता
और पैसा चाहिये.
इस दुनिया
में
हमारे
माता-पिता
के
अलावा
कोई
अन्य
वरिष्ठ
नहीं.......
बसपा
भी
नहीं
जय बुद्ध
जय
भीम,
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